

वे लगभग 14 वर्ष की आयु में व्यापार के उद्देश्य से भिवानी से कोलकाता चले आए । वे एक कर्मयोगी, पुरुषार्थी, अध्यात्मिक, धर्मपरायण, सात्विक, समाजसेवी और परोपकारी व्यक्ति थे । उन्होंने यह दिखाया कि सच्ची संपत्ति केवल धन में नहीं, बल्कि समाज और धर्म के प्रति योगदान में निहित है । वे हरियाणा चैरिटेबल सोसाइटी, अग्रसेन मेडिकल रिसर्च इंस्टीच्यूट अग्रोहा, हरियाणा विद्यामंदिर तथा हरियाणा नागरिक संघ के सदस्य रहे । हरियाणा के कुरुक्षेत्र में अपने स्वर्गीय माता – पिता की स्मृति में वृद्धाश्रम का निर्माण करवाया, जिसका संचालन बाबा काली कमलीवाला पंचायत कर रही है । Courtesy – Bhai Kedar / Bhai Shanker / Beta Jagmohan
वे धर्मपरायण, घर के कामों में दक्ष, हँसमुख, सदाचारी एवम् अच्छे स्वभाव की थी। उन्होने परिवार को संगठित व संयुक्त रखा । माँ अन्नपुर्णा की उन पर कृपा थी। जिस काल में कम लोग ही पढ़ना-लिखना जानते थे वे एक स्त्री हो कर भी जानती थी । अपनी देवराणीयों को वे अपनी छोटी बहन मानती थी । उनकी पुण्यस्मृति में उनके पुत्रो स्वर्गीय रतन लाल एवं शंकर लाल दोनों ने मिलकर एक Guest House “Dropati Niwas” के नाम से “पुरुषोत्तम दास रतन लाल सेवा ट्रस्ट” के अधीन रमन रेती (फोगला आश्रम के सामने गली) में बनवाया । Courtesy – Bhai Kedar / Pradeep