

सरल स्वभाव, धार्मिक प्रवृत्ति और समाजसेवा के भाव से परिपूर्ण रतनलालजी ने अपने जीवन को केवल व्यापार तक सीमित नहीं रखा, बल्कि धर्म, समाज और सेवा के कार्यों को भी सर्वोपरि स्थान दिया । वे सुद्ध वैष्णव भोजन किया करते थे । उन्होंने अनेक मंदिरों के जीर्णोद्धार में योगदान दिया, जिनमें बाबा गंगाराम मंदिर (लुहारी) और श्रीराम जानकी मंदिर (हैस्टिंग्स) प्रमुख हैं । वे वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के दानदाता बने और धार्मिक कार्यों में निरंतर सहयोग प्रदान करते रहे । Courtesy – Beta Jagmohan