Pirojan
श्री गणेशाय नमः
जय बाबा गंगाराम की
पहले दिन सुबह नहा धोकर पुरोहित को देव लाने की बोले । गेट पर चौक पुरकर पाटा पर पुरोहित देव के साथ खड़ा होवे । फिर देव के पुराहित के तथा खुद के टिका करके देव को ओढना से मिनकर कोठा मे पाटापर गमछा बिछाकर बिराजे और एक गमछा से ढक देवै । पुरोहित को दक्षिणा देवें । देव का कोठा साफ रखे एवं एक चद्दर का पड़दा लगावे । यह चद्दर बहन बेटी के जावेगी । दोनो समय रोजाना दीपक जला कर चावल और रूपये से धोक लगावे । पहला, दूसरा तथा तिसरा दिन एक गमछा देव के नीचे बिछाना और एक गमछा देव को ओढाना है । पांचवे दिन दो गमछा देव के नीचे बिछाना और दो गमछा देव को ओढाना है । कुल दस गमछों मे से पाँच बहन बेटी और पाँच पुरोहित को देना है ।
दोपहर दो तिन बजे सवा पाव जौ से हलदात करे । माँ की पहनी हुई साड़ी कब्जा नाई को देवे ।
शाम को लड़का के माँ पापा पहले खाना खा लेवे, फिर नहाकर देवता के सपरिवार चावल व रुपये से धोक लगावे । धोक के बाद मम्मी पापा कुछ नही खावे । फिर दो घड़ (एक घड़े के ऊपर एक लोटा) पानी सरपर रखकर कोठा मे कोने मे रख देवे । फिर नौज सिलाई से सातबार छुवे दोनो जने, फिर एक प्याला मेँ सात मुट्ठी और सात आंजले डाले । तिन दिन तक इसी तरह नोज छुना है ।
पहला, दूसरा तथा तिसरा दिन नौज – सवा नौ सेर आटा, सवा दो सेर घी और सवा तिन सेर चीनी लगेगी । इसमे से पहले दिन रातको सवा तिन सेर आटा, घी व चिनी के मालपुवे बनावे । दूसरा दिन सुबह बचे हुए छह सेर आटा की पुड़ी बनावे । चावल सवा तिन सेर बनावे । दाल, सब्जी जरुरत के अनुसार बनावे । खाने मे ढाई पाव घी, बुरा सात थाली मे को घी का नाल दे कर दो – दो पुड़े व पुरी, चावल, घी, बुरा तथा बगैर नमक के मूंग दाल की पकोड़ी सात औरतो को जिमावे जिसमे लड़का की माँ और भुवा भी बेठेगी ।
दूसरा नोज पौने से पहले, पहले दिन वाला नोज का खाना सल्टाकर (बाँटकर) चौका साफ कर फिर नया नोज छूए ।
चौथा दिन खाली जावेगा ।
पाँचवा दिन नौज दुगना / डबल छूना है। रात मे साढे छह सेर आटा, घी व चिनी के मालपुवे बनावे । छठा दिन सुबह बचे हुए छह + छह = 12 सेर आटा की पुड़ी बनावे । चावल साढे छह सेर + छठी के नाम के सवा तीन सेर चावल और अलग से बनेंगे (total 9¼ सेर) । दाल, सब्जी जरुरत के अनुसार बनावे ।
छठा दिन सुबह भात लेना है । भात के समय माँ, पापा व लड़का; भुवा के लाये हुए कपड़े पहने । आंगन मे चौक पुरकर पाटापर माँ बेटा को गौद मे लेकर बेठे । पापा आटा की लोई मुट्ठी मेँ लेकर बहु के सिर पर रख कर खड़ा रहवे । भाई (मामा), बहन (माँ) के आंजले भरावे ।
चार नमक के आंजले नाई को देवे । चार चना के आंजले पुरोहित को देवे । चार मोती के आंजले ननंद को देवे । चार सुहाली के आंजले ननंद को देवे । चार लड्डू के आंजले ननंद को देवे । चार खिलौना के आंजले ननंद को देवे । चार रुपये (Note of any denomination) के आंजले ननंद को देवे । चार चान्दी के सिक्के या रेजगी जो भी मन मे हो के आंजले ननंद को देवे । Total 32 आंजले होते है । भात से उठकर लड़के की माँ सबके पैर छुए । भाती सबको मिलाई दे तथा भातन पैर पड़ाई देवे ।
भात के बाद चौदह थाली मे घी का नाल दे कर दो – दो पुड़े व पुरी, चावल, घी, बुरा तथा बगैर नमक के मूंग दाल की पकोड़ी चौदह औरतो को जिमावे जिसमे लड़का की माँ और भुवा भी बेठेगी । फिर छठी के नाम का सात थाली मे घी का नाल देकर सात औरतो को अतिरिक्त खाना देवे; लेकिन इन सात थाली मे पुड़े नहीं देना है । टोटल इक्कीस औरत जिमानी है ।
भात के नाम का सभी भाईयों, परिचितो एवम् पुरोहितों के परिवार को न्यौता देना । Party मे सब जने का खाना हो जाने पर नौज वाला सारा सामान सल्टाकर (बाँटकर) चौका साफ कर बाल उतरवाने जावे । गठजोड़ा से थाली मे रोली, चावल, गेहूँ, आटा का दिवा जिस मेँ पाँच बत्ती हो, चार लड्डू, एक नाल की जोड़ी, पानी का लोटा आदी लेकर जावे । पहले धौक मारे फिर लड़के को घर के बड़े के गौद मे बैठाकर बाल उतरावे । बाल माँ के आंचल मे बांधकर ले आवे । लडकियों के नाक कान मे हल्दी लगावे ।
घर आकर माँ की सिरगुत्थी ननंद करे । फिर माँ सबको पैर पड़ाई देवे । बड़े सब बच्चौं को कुछ देकर आर्शीवाद देवे । फिर एक नया देव बनवा कर गले मे घुंघरू पहनाकर पुरोहित को दे देवे ।
कुल नोज
|
Item |
1st Day |
2nd Day |
3rd Day |
5th Day |
Total |
|---|---|---|---|---|---|
|
आटा |
9¼ |
9¼ |
9¼ |
18 ½ |
46¼ |
|
घी |
2¼ |
2¼ |
2¼ |
4½ |
11¼ |
|
चीनी |
3¼ |
3¼ |
3¼ |
6½ + 3¼ |
19½ |
|
मालपुवे |
3¼ |
3¼ |
3¼ |
6½ |
16¼ |